June 2015

शून्य गढ शहर, शहर घर बस्ती

आज सकाळपासून कुमारांचे हे निर्गुणी भजन डोक्यात घोळत होते.

https://youtu.be/wwgOnaoyArw

शून्य गढ शहर, शहर घर बस्ती
कौन सूता कौन जागे है
लाल हमरे हम लालान के
तन सोता ब्रह्म जागे है

जल बिच कमल, कमल बिच कलियाँ
भँवर बास न लेता है
इस नगरी के दस दरवाजे,
जोगी फेरी नित देता है

तन की कुण्डी मन का सोटा
ज्ञानकी रगड लगाता है
पाञ्च पचीस बसे घट भीतर
उनकू घोट पिलाता है

अगन कुण्डसे तपसी ताप
तपसी तपसा करता है
पाञ्चो चेला फिरे अकेला,
अलख अलख कर जपता है

पाने